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Laparoscopic Surgery Meaning in Hindi: लैप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?

Laparoscopic Surgery Meaning in Hindi: लैप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) एक मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीक है, जिसका उपयोग शरीर में छोटे-छोटे चीरे करके विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसमें सर्जन को स्पेशल कैमरा (laparoscope) की सहायता से सर्जरी की प्रक्रिया को देख सकते हैं और सटीकता से इलाज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में शरीर में बड़े चीरे नहीं किए जाते, जिसके कारण काफी कम दर्द और बेहतर रिकवरी होती है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को कभी-कभी कीhole सर्जरी भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर में एक या दो छोटे चीरे बनाए जाते हैं, जिनके जरिए कैमरा और सर्जिकल उपकरण अंदर डाले जाते हैं। यह सर्जरी कई प्रकार की बीमारियों और रोगों के इलाज में उपयोग की जाती है, जैसे कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, गॉल ब्लैडर की सर्जरी, और बारीयट्रिक सर्जरी।

आइए जानते हैं कि लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे काम करती है और इसके लाभ क्या हैं:

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे काम करती है?

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में सबसे पहले पेट के हिस्से में छोटे चीरे किए जाते हैं। फिर लैप्रोस्कोप (जो एक पतली ट्यूब जैसी होती है, जिसमें एक छोटा कैमरा और लाइट लगी होती है) को उस हिस्से में डाला जाता है, ताकि सर्जन को भीतर का दृश्य साफ दिखाई दे। कैमरा सर्जन को स्क्रीन पर ऑपरेशन क्षेत्र का विस्तृत दृश्य प्रदान करता है, जिससे सर्जरी को बहुत सावधानी और सटीकता से किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया में सर्जिकल उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जो छोटे चीरे से शरीर के अंदर डाले जाते हैं। सर्जरी के बाद, चीरों को बंद कर दिया जाता है, और मरीज को कम दर्द और सूजन का अनुभव होता है। इसके परिणामस्वरूप मरीज की रिकवरी समय बहुत कम हो जाता है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में उपयोग किए जाने वाले उपकरण

Laparoscopic Surgery in Hindi (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) में विभिन्न प्रकार के विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है:

1. लैप्रोस्कोप

यह एक पतला, दूरबीन जैसा उपकरण है जिसमें प्रकाश स्रोत और कैमरा होता है। यह शरीर के अंदर की छवियों को बाहर के मॉनिटर पर प्रदर्शित करता है।

2. ट्रोकार

ये ट्यूब-जैसे उपकरण हैं जो शरीर की दीवार में डाले जाते हैं और जिनके माध्यम से लैप्रोस्कोप और अन्य उपकरण गुजरते हैं।

3. इंसफ्लेटर

यह उपकरण पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरने के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे एक कार्य स्थान बनता है।

4. विशेष सर्जिकल उपकरण

  • ग्रास्पर्स और फोरसेप्स: ऊतकों को पकड़ने और हटाने के लिए।

  • सिज़र्स: ऊतकों को काटने के लिए।

  • स्टेप्लर और क्लिप एप्लायर: रक्त वाहिकाओं को सील करने और ऊतकों को जोड़ने के लिए।

  • सक्शन-इरिगेशन डिवाइस: ऑपरेशन साइट को साफ करने के लिए।

  • एलेक्ट्रोकॉटरी उपकरण: ऊतकों को काटने और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए।

5. विडियो सिस्टम

  • हाई-डेफिनिशन कैमरा

  • लाइट सोर्स

  • विडियो प्रोसेसर

  • मॉनिटर

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के प्रकार और अनुप्रयोग

Laparoscopic Surgery Meaning in Hindi के अंतर्गत, कई प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाएं शामिल हैं:

1. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी

  • लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी: पित्ताशय को निकालने की सर्जरी, जो सबसे आम लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया है।

  • लैप्रोस्कोपिक अपेंडेक्टॉमी: अपेंडिक्स को निकालने की सर्जरी।

  • लैप्रोस्कोपिक हर्निया रिपेयर: पेट की दीवार में हर्निया (फतक) की मरम्मत।

  • लैप्रोस्कोपिक कोलेक्टॉमी: आंतों के हिस्से को निकालने की सर्जरी।

  • लैप्रोस्कोपिक बैरियाट्रिक सर्जरी: वजन कम करने के लिए विभिन्न प्रक्रियाएं, जैसे गैस्ट्रिक बाईपास या स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी।

2. गायनेकोलॉजिकल सर्जरी

  • लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी: गर्भाशय को निकालने की सर्जरी।

  • लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी: गर्भाशय से फाइब्रॉयड्स (अर्बुद) को निकालना।

  • लैप्रोस्कोपिक ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी: अंडाशय की सिस्ट को निकालना।

  • लैप्रोस्कोपिक एंडोमेट्रियोसिस सर्जरी: एंडोमेट्रियोसिस के कारण होने वाले ऊतकों को निकालना।

3. यूरोलॉजिकल सर्जरी

  • लैप्रोस्कोपिक नेफ्रेक्टॉमी: गुर्दे को निकालने की सर्जरी।

  • लैप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टॉमी: प्रोस्टेट ग्रंथि को निकालने की सर्जरी।

  • लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी: गुर्दे और मूत्रवाहिनी के जंक्शन की मरम्मत।

4. थोरैसिक सर्जरी

  • थोरैकोस्कोपिक सर्जरी: छाती के अंगों, जैसे फेफड़े, पर की जाने वाली मिनिमली इनवेसिव सर्जरी।

  • वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (VATS): फेफड़े के ट्यूमर या अन्य रोगों के इलाज के लिए।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की प्रक्रिया

Laparoscopic Surgery in Hindi (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:

1. एनेस्थीसिया

अधिकांश लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं के लिए जनरल एनेस्थीसिया का उपयोग किया जाता है, जिसमें मरीज पूरी प्रक्रिया के दौरान सो जाता है।

2. चीरे और ट्रोकार्स का प्रवेश

  • सर्जन पेट में कई छोटे चीरे (आमतौर पर 3-5) लगाता है, प्रत्येक की लंबाई 0.5-1.5 सेमी होती है।

  • इन चीरों के माध्यम से ट्रोकार्स (खोखले ट्यूब) डाले जाते हैं।

3. पेट का फुलाना (इंसफ्लेशन)

  • कार्बन डाइऑक्साइड गैस पेट में भरी जाती है, जिससे काम करने के लिए जगह बनती है और अंगों को देखना आसान हो जाता है।

4. लैप्रोस्कोप का प्रवेश

  • एक ट्रोकार के माध्यम से लैप्रोस्कोप (कैमरा) डाला जाता है।

  • लैप्रोस्कोप से प्राप्त छवियां मॉनिटर पर प्रदर्शित होती हैं।

5. सर्जिकल उपकरणों का प्रवेश

  • अन्य ट्रोकार्स के माध्यम से विभिन्न सर्जिकल उपकरण डाले जाते हैं।

  • इन उपकरणों का उपयोग करके, सर्जन वांछित प्रक्रिया करता है, जैसे अंग को निकालना, ऊतक को काटना, या मरम्मत करना।

6. प्रक्रिया का समापन

  • सर्जरी पूरी होने के बाद, उपकरण और ट्रोकार्स निकाल लिए जाते हैं।

  • पेट से गैस निकाल दी जाती है।

  • चीरे को टांके या स्टेरी-स्ट्रिप्स से बंद कर दिया जाता है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभ

Laparoscopic Surgery Meaning in Hindi के अनुसार, इस प्रकार की सर्जरी के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं:

1. मरीजों के लिए लाभ

  • कम दर्द: छोटे चीरे के कारण, ऑपरेशन के बाद का दर्द कम होता है।

  • छोटे निशान: सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर परिणाम, क्योंकि चीरे छोटे होते हैं।

  • कम रक्तस्राव: मिनिमली इनवेसिव प्रकृति के कारण रक्तस्राव कम होता है।

  • कम संक्रमण का जोखिम: छोटे चीरे संक्रमण के जोखिम को कम करते हैं।

  • अस्पताल में कम समय: मरीज आमतौर पर जल्दी घर जा सकते हैं, कभी-कभी उसी दिन या 1-2 दिनों के भीतर।

  • तेज रिकवरी: सामान्य गतिविधियों और काम पर वापसी तेजी से होती है।

  • कम जटिलताएं: पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताएं कम होती हैं।

2. चिकित्सकों के लिए लाभ

  • बेहतर दृश्यता: लैप्रोस्कोप से प्राप्त आवर्धित छवियां शरीर के अंदर की बेहतर दृश्यता प्रदान करती हैं।

  • कम संक्रमण दर: रोगियों में कम संक्रमण का मतलब है कि उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

  • जटिल क्षेत्रों तक पहुंच: छोटे उपकरण शरीर के कुछ जटिल क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच प्रदान करते हैं।

  • तकनीकी प्रगति: नई तकनीकों और उपकरणों का लगातार विकास सर्जनों को नए कौशल सीखने और अपनाने का अवसर प्रदान करता है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की सीमाएं और जोखिम

Laparoscopic Surgery in Hindi (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) के कई फायदे होने के बावजूद, इसकी कुछ सीमाएं और जोखिम भी हैं:

1. तकनीकी सीमाएं

  • सीमित स्पर्श संवेदन: सर्जन को ऊतकों का स्पर्श प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलता, जिससे कभी-कभी अनुभव की आवश्यकता होती है।

  • 2D दृश्य: कुछ लैप्रोस्कोपिक सिस्टम केवल 2D दृश्य प्रदान करते हैं, जिससे गहराई का अनुमान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  • सीमित कार्य क्षेत्र: पेट के अंदर काम करने की जगह सीमित होती है।

  • प्रशिक्षण समय: इस तकनीक में महारत हासिल करने के लिए अधिक प्रशिक्षण और अनुभव की आवश्यकता होती है।

2. संभावित जटिलताएं

  • ट्रोकार से चोट: ट्रोकार डालते समय आसपास के अंगों या रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है।

  • गैस से संबंधित समस्याएं: पेट में भरी गई कार्बन डाइऑक्साइड के कारण कंधे में दर्द या डायाफ्राम पर दबाव हो सकता है।

  • खुली सर्जरी में बदलने की आवश्यकता: कुछ मामलों में, तकनीकी कठिनाइयों या जटिलताओं के कारण लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया को खुली सर्जरी में बदलना पड़ सकता है।

  • एनेस्थीसिया से संबंधित जोखिम: जनरल एनेस्थीसिया से जुड़े सामान्य जोखिम।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से पहले और बाद की देखभाल

Laparoscopic Surgery Meaning in Hindi (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का अर्थ हिंदी में) के संदर्भ में, सर्जरी से पहले और बाद की देखभाल महत्वपूर्ण है:

सर्जरी से पहले

  1. मेडिकल मूल्यांकन: डॉक्टर आपके स्वास्थ्य इतिहास, वर्तमान दवाओं और एलर्जी की समीक्षा करेंगे।

  2. परीक्षण: रक्त परीक्षण, हृदय परीक्षण (ईसीजी), या अन्य इमेजिंग अध्ययन किए जा सकते हैं।

  3. उपवास निर्देश: आमतौर पर, सर्जरी से पहले 8-12 घंटे तक खाना-पीना बंद करने की सलाह दी जाती है।

  4. दवा समायोजन: कुछ दवाओं, जैसे एस्पिरिन या रक्त पतला करने वाली दवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने की आवश्यकता हो सकती है।

  5. तैयारी निर्देश: नहाना, आभूषण हटाना, और अस्पताल में आने से पहले अन्य निर्देशों का पालन करना।

सर्जरी के बाद

  1. रिकवरी रूम: सर्जरी के बाद, आपको कुछ घंटों के लिए रिकवरी रूम में रखा जाएगा।

  2. दर्द प्रबंधन: दर्द नियंत्रण के लिए दवाएं प्रदान की जाएंगी।

  3. गतिविधि: धीरे-धीरे गतिविधि शुरू करने की सलाह दी जाती है, अक्सर सर्जरी के दिन ही।

  4. आहार: तरल पदार्थों से शुरू करके धीरे-धीरे सामान्य आहार पर वापस आना।

  5. घाव की देखभाल: चीरे को साफ और सूखा रखें और संक्रमण के संकेतों पर नजर रखें।

  6. फॉलो-अप अपॉइंटमेंट: सर्जन के साथ फॉलो-अप अपॉइंटमेंट का पालन करें।

  7. गतिविधि प्रतिबंध: कुछ समय के लिए भारी वजन उठाने या कठोर व्यायाम से बचें (आमतौर पर 2-4 सप्ताह)।

भारत में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

भारत में Laparoscopic Surgery in Hindi (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

1. उपलब्धता और पहुंच

  • शहरी केंद्र: लैप्रोस्कोपिक सर्जरी अब भारत के अधिकांश बड़े शहरों और कई छोटे शहरों में उपलब्ध है।

  • ग्रामीण पहुंच: ग्रामीण क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे पहुंच बढ़ रही है, विशेष रूप से सरकारी पहलों के माध्यम से।

  • मोबाइल सर्जिकल यूनिट्स: कुछ संगठन मोबाइल सर्जिकल यूनिट्स के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में लैप्रोस्कोपिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

2. लागत और किफायती

  • लागत तुलना: भारत में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की लागत पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम है, लेकिन पारंपरिक सर्जरी से थोड़ी अधिक हो सकती है।

  • बीमा कवरेज: कई स्वास्थ्य बीमा योजनाएं अब लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं को कवर करती हैं।

  • सरकारी योजनाएं: कई सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी शामिल है, जिससे गरीब मरीजों के लिए भी यह सुलभ हो गई है।

3. प्रशिक्षण और विशेषज्ञता

  • प्रशिक्षण कार्यक्रम: भारत के कई मेडिकल कॉलेज और प्रशिक्षण केंद्र लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय मानक: कई भारतीय सर्जन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित हैं और विश्व स्तरीय सेवाएं प्रदान करते हैं।

  • अनुसंधान और नवाचार: भारतीय संस्थान लैप्रोस्कोपिक तकनीकों और उपकरणों में नवाचार कर रहे हैं।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का भविष्य

Laparoscopic Surgery Meaning in Hindi में इसके भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन करना भी महत्वपूर्ण है:

1. तकनीकी प्रगति

  • 3D लैप्रोस्कोपी: बेहतर गहराई अनुभव के लिए 3D इमेजिंग सिस्टम।

  • 4K रेज़ोल्यूशन: अति उच्च-गुणवत्ता वाली छवियां अधिक विस्तृत दृश्य प्रदान करती हैं।

  • फ्लोरेसेंट इमेजिंग: विशेष डाई के उपयोग से विशिष्ट ऊतकों, जैसे ट्यूमर या रक्त वाहिकाओं, को हाइलाइट करना।

  • रोबोटिक एसिस्टेंस: लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं में रोबोटिक तकनीक का एकीकरण।

2. नए अनुप्रयोग

  • सिंगल-इनसिज़न लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (SILS): केवल एक चीरे के माध्यम से पूरी प्रक्रिया करना।

  • नैचुरल ओरिफिस ट्रांसलुमिनल एंडोस्कोपिक सर्जरी (NOTES): प्राकृतिक शरीर छिद्रों, जैसे मुंह या योनि, से प्रवेश करके सर्जरी करना।

  • माइक्रोलैप्रोस्कोपी: अधिक छोटे उपकरणों का उपयोग करके और भी कम इनवेसिव प्रक्रिया।

3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

  • प्रीऑपरेटिव प्लानिंग: सर्जरी से पहले योजना बनाने में AI का उपयोग।

  • इंट्राऑपरेटिव गाइडेंस: सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण संरचनाओं की पहचान करने में सहायता।

  • रोबोटिक सिस्टम में एकीकरण: अधिक स्वायत्तता और सटीकता के लिए रोबोटिक सिस्टम में AI का उपयोग।

डॉ. अलॉय जे मुखर्जी को क्यों चुनें?

डॉ. अलॉय जे मुखर्जी Best Laparoscopic Surgeon in Delhi में से एक हैं, जिन्होंने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में वर्षों का अनुभव प्राप्त किया है। वे अपनी मिनिमली इनवेसिव तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपचार के लिए प्रसिद्ध हैं।

डॉ. मुखर्जी का मानना है कि लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में सही सर्जिकल तकनीक का पालन करने से मरीज को न केवल तेज रिकवरी मिलती है, बल्कि इस प्रक्रिया में दर्द और जोखिम भी कम होते हैं। वे विभिन्न प्रकार के सर्जिकल उपचार प्रदान करते हैं, जिसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी, हर्निया सर्जरी, वजन घटाने के ऑपरेशन, और गाइनेकोलॉजिकल सर्जरी शामिल हैं।

उनकी कड़ी मेहनत, अनुभव और मरीज़ों के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें दिल्ली के श्रेष्ठ लैप्रोस्कोपिक सर्जन में से एक बना दिया है। उनके द्वारा किए गए लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशंस न केवल सुरक्षित होते हैं, बल्कि मरीज़ों को जल्दी स्वस्थ भी कर देते हैं। यदि आप दिल्ली में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लिए एक अनुभवी और विश्वसनीय सर्जन की तलाश कर रहे हैं, तो डॉ. अलॉय जे मुखर्जी आपके लिए सर्वोत्तम विकल्प हो सकते हैं।

निष्कर्ष

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एक बेहद प्रभावी और सुरक्षित तरीका है, जो मरीजों को जल्दी रिकवरी और कम दर्द की सुविधा प्रदान करता है। अगर आप सर्जरी की आवश्यकता महसूस करते हैं, तो डॉ. अलॉय जे मुखर्जी, जो Best Laparoscopic Surgeon in Delhi हैं, से संपर्क कर सकते हैं। उनके विशेषज्ञ अनुभव और मरीजों के प्रति उनके समर्पण के कारण, वे लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प साबित होते हैं।

अगर आपको लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बारे में और जानकारी चाहिए, तो डॉ. अलॉय जे मुखर्जी से संपर्क करें और अपने स्वास्थ्य के बारे में सही मार्गदर्शन प्राप्त करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का मतलब क्या होता है?

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें शरीर में केवल छोटे-छोटे चीरे किए जाते हैं, इसके बाद लैप्रोस्कोप (जो एक पतला, लचीला ट्यूब होता है जिसमें कैमरा और लाइट लगी होती है) के माध्यम से डॉक्टर अंदर की स्थिति को देखता है और सर्जरी करता है। इस प्रक्रिया में बड़े चीरे नहीं किए जाते, जिससे कम दर्द और तेजी से रिकवरी होती है। यह सर्जरी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, गॉल ब्लैडर, हर्निया और बारीयट्रिक सर्जरी जैसे कई इलाजों के लिए उपयोगी होती है।

2. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में कितने टांके होते हैं?

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे चीरे किए जाते हैं, जिनमें आमतौर पर 2-4 टांके लगते हैं। इन टांकों का आकार बहुत छोटा होता है और इसके परिणामस्वरूप न्यूनतम निशान और कम दर्द होता है। सर्जरी के बाद इन टांकों को जल्दी से ठीक किया जाता है, और रिकवरी भी जल्दी होती है।

3. लेप्रोस्कोपी कब करना चाहिए?

लेप्रोस्कोपी तब की जाती है जब डॉक्टर को शरीर के अंदर की स्थिति का सटीक और स्पष्ट दृश्य चाहिए होता है। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब:

  • गॉल ब्लैडर में पत्थर या सूजन हो।

  • हर्निया या पेट के हिस्से में सूजन हो।

  • बैरियाट्रिक सर्जरी (वजन घटाने के लिए) की आवश्यकता हो।

  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं (जैसे गैस्ट्रिक अल्सर) हो।

  • महिलाओं में गाइनेकोलॉजिकल समस्याएं (जैसे ओवरी सिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस) हो।

इसमें कोई बड़ी सर्जरी करने से पहले मिनिमली इनवेसिव तकनीक का उपयोग किया जाता है ताकि कम जोखिम और कम दर्द हो।

4. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कितनी दर्दनाक है?

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में कम दर्द होता है क्योंकि इसमें बड़े चीरे नहीं किए जाते। सर्जरी के बाद सिर्फ छोटे-छोटे टांके होते हैं, जिससे शरीर पर कम दबाव और आघात होता है। वसूली समय भी जल्दी होता है, और मरीज को कम दर्द का सामना करना पड़ता है। हालांकि, सर्जरी के बाद हल्का असुविधा और दर्द हो सकता है, लेकिन यह सामान्यत: 2-3 दिन में ठीक हो जाता है। डॉक्टर द्वारा दिए गए दर्द निवारक दवाइयां इस प्रक्रिया को और भी आसान बनाती हैं।

5. लेप्रोस्कोपी कब की जाती है?

लेप्रोस्कोपी तब की जाती है जब मेडिकल समस्याओं का निदान करना या इलाज करना जरूरी हो और इससे कम जोखिम और जल्दी रिकवरी हो। इसे आमतौर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, गॉल ब्लैडर, हर्निया, और गाइनेकोलॉजिकल समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। अगर किसी रोगी को इन समस्याओं का सामना हो, तो डॉक्टर लेप्रोस्कोपी को सर्जरी से पहले या बाद में उपयुक्त मान सकते हैं।